पाकिस्तान हमेशा से ही भारत को हिन्दू राष्ट्र कह कर हिन्दुओं पर कट्टरवादी होने का आरोप लगाता आया है। लेकिन भारत-पाक विभाजन के बाद भारत की हदबंदी में आई ‘ मस्जिदों ‘ को आज भी हिन्दू परिवार संभाले हुए है। बस फर्क इतना ही है कि आज उन्हीं मस्जिदों की इमारतों में मंदिर और श्री गुरुद्वारा साहिब स्थपित है जो पकिस्तान के आरोपों का जीता जागता जवाब है। ऐसी ही एक मस्जिद पंजाब के जिला फाजिल्का के गांव पंजावा मांडल में है जहाँ पर श्री मदभागवत गीता  सहित रामायण का पाठ होता है। फाजिल्का से करीब 50 किलोमीटर दूर पंजाब के अंतिम छोर पर बसा गांव ‘ पंजावा मांडल ‘ भारत-पाक विभाजन से पूर्व मुस्लिम बहुतायत वाला गांव था। हालात बिगड़े और आखिर विभाजन के बाद यहाँ से मुस्लिम परिवार पकिस्तान को कूच कर गए और उनके पीछे छुट गई धार्मिक आस्था से जुड़े पीर-पैगम्बरों की मस्जिदें और घर-बार।

हिन्दुओं और बाकि धर्मों से सबंधित लोगों ने दोबारा गांवों को बसाना शुरू किया और यहाँ से पलायान कर गए मुस्लिम समुदाय कि मस्जिदों की संभाल करने के लिए उनमैं एक और जहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया वहीं दूसरी और राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित करते हुए गीता मंदिर की स्थापना की, ताकि इमारतों को गिराने अथवा बिना संभाल के किसी के धर्म की बेअदबी ना हो। गांव पंजावा मांडल में स्थित मस्जिद में स्थापित गीता मंदिर में श्री मदभागवत गीता के साथ रामायण का पाठ भी होता है। जबकि इसी गांव के नजदीकी गांव गीदडावाली में स्थित मस्जिद में श्री गुरुग्रंथ साहिब का प्रकाश किया गया है।

गीता मंदिर के सेवादार प्रदीप कुमार बताते है कि, विभाजन के बाद इस मस्जिद में उनके पूर्वजों द्वारा गीता मंदिर स्थापित किया गया। मंदिर में स्थापित राधा-कृष्ण की मूर्ति भी करीब 60 वर्ष से अधिक पुरानी है। मस्जिद की छत ख़राब होने के कारण उसको बदला गया है जबकि बाकि ईमारत उसी तरह है। यहाँ पर रोजाना पूजा पाठ होता है और वर्ष में दो बार श्री जनमष्टमी और राम नवमी त्यौहार पर बड़ा कार्यक्रम किया जाता है। जिसमें गांव के इलावा नजदीकी गांवों से ग्रामीण बड़ी गिनती में शिरकत करते है। उन्होंने बताया कि ‘ मस्जिद में मंदिर ‘ भारत की धर्म निरपेक्षता का बड़ा उदहारण है।
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