इस प्राचीन शिव मंदिर में शिवशंभू अपने भक्तों की सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर पूरी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में रात के समय सांपों का जोड़ा निकलता है। करीब 200 साल पुराने इस प्राचीन शिवमंदिर के बारे में बताया जाता है कि एक मुस्लिम जमींदार ने महात्मा को जमीन दान देकर यह मंदिर बनवाया था।

महात्मा के ताप से दूर हुआ था सूखा –
बेहट कस्बे के मोहल्ला महाजनान स्थित प्राचीन मंदिर के बारे में पंडित मुरारी झा ने मंदिर के बारे में जानकारी दी।  पंडित मुरारी झा ने बताया कि यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है।  उन्‍होंने बताया कि करीब 200 साल पहले बेहट क्षेत्र में अकाल पड़ा था। बारिश न होने से लोग खेतों में फसल नहीं बो सके थे, अकाल के कारण लोग भूखमरी के कगार पर पहुंच गए थे।

बारिश के लिए गांव के लोग हर तरह के जतन कर इंद्रदेव को प्रसन्न करने के प्रयास कर रहे थे।  इसी दौरान देवगिरी नाम के महात्मा बेहट में आए। महात्मा देवगिरि ने कस्बे के बाहर अपनी कुटिया बना ली। महात्मा द्वारा कुटिया बनाने की खबर पर बेहट के मुस्लिम जमींदार उनके पास पहुंचे। जमींदार ने महात्मा से कुटिया कहीं और जाकर बनाने की बात कही। तब महात्मा ने कहा कि वे तो साधु हैं। यहां ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे किसी को आपत्ति हो। तब उनकी बात सुनकर मुस्लिम जमींदार ने कहा कि यदि आप सच्चे महात्मा हो तो बेहट का अकाल दूर करके दिखाओ।  बताया जाता है कि तब महात्मा ने जमींदार से कहा कि वह घर वापस चले जाएं, बारिश हो जाएगी।
लोगों का कहना है कि जमींदार अपने घर पहुंचे भी नहीं थे कि अचानक आसमान में बादल उमड़ पड़े और कुछ ही देर बाद बारिश शुरू हो गई।  तब महात्मा के तप से प्रभावित होकर मुस्लिम जमींदार ने उस कुटिया के पास की जमीन मंदिर बनवाने के लिए दान में दे दी। मुस्लिम जमींदार ने जैसे ही मंदिर में कदम रखा उसके पास अचानक दौलत आ गई। तभी लोगों की मान्यता है यहां आने से हर मुराद पूरी होती है।
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