मान्यता है कि मां नेतुला के दरबार में कष्टी देने से नेत्र से संबंधित विकार दूर होता है। इस कारण सालों भर माता के दरबार में नेत्र रोग से परेशान पुरूष व महिला श्रद्धालुओं का लगा लगा रहता है. काली मंदिर जुमई, जमुई रेलवे स्टेशन के सामने (मलयपुर) में स्थित है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है। प्रत्येक वर्ष दीपावली से छठ तक इस जगह पर बहुत ही प्रसिद्ध मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को काली मेला के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर निर्माण का श्रेय मलयपुर निवासी अशोक सिंह को जाता है। उन्हीं के कठिन परिश्रम से जमुई काली मंदिर की सुन्दरता और रख-रखाव बरक़रार है। जमुई काली मंदिर जमुई ज़िले का गौरव है यह स्थान मुख्यतः हर साल आयोजित होने वाले एक बड़े मेले काली मेले के लिये जाना जाता है।
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जमुई मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव के समीप श्मशान भूमि स्थित मां नेतुला की दुर्गा पूजा में सभी धर्मो के लोगों का खास महत्व बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में सच्चे भक्तिभाव से 30 दिनों तक धरना देने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। नेतुला मां के दरबार में अब तक आधे दर्जन से अधिक अंधे व्यक्ति की खोई हुई आंखों की रौशनी व नि:संतान दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति हो चुकी है। मां नेतुला मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के अलावे तंत्र-मंत्र की भी सिद्धी होती है। मनचाही मुराद पूरी होने के बाद श्रद्धालु सोने या चांदी की आंखें चढ़ाते हैं। संतान प्राप्ति वाले दंपति बकरे की बलि देते है। अष्टमी और नवमी के दिन 12 सौ बकरे की बलि दी जाती है। इस मंदिर में मां नेतुला की मूर्ति के अलावे लक्ष्मी-विष्णु, राम-हनुमान, ऋद्धि-सिद्धि की भी भी पूजा होती हैं।

 

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