यहां के लोग दाल रोटी नहीं, कुत्ता कछुआ और घोड़ा खाते हैं…

यहां के लोग दाल रोटी नही कुत्‍ता कछ़ुआ और घोड़े का खाते हैं मांस। किसी आदमी को दाल रोटी पसंद है तो किसी आदमी को चिकन पसंद है। ये तो आम बात है, लेकिन उन देश के लोगों का क्‍या कहना जो कुत्‍ता, कछुआ, सांप, मकड़ी और घोड़ा आदि तक खा जाते हैं।

भारत में तो लोग अभी चिकन और मटन तक ही सीमित हैं लेकिन बाहरी देश जैसे, चाइना, ताइवान, मैक्‍सिको, जापान और खाड़ी देशों के लोग खाने के मामले में कहीं आगे निकल चुके हैं। आपको जान कर हैरानी होगी कि कई लोग जंगली छिपकली खाते हैं कई लोग तो जिंदा ऑक्‍टोपस ही काटकर खा जाते हैं।
इन देशों के लोगों को कुत्‍ता- मकड़ी खाते हुए देख लें तो सच मानिये कि उसके लिये यह एहसास बहुत ही घिनौना होगा। आइये जानते हैं कि कौन कौन से देशों में यह अजीब हरकते की जाती हैं।
qq.jpg
घोड़ा: फ्रांस घोड़े का मीट फ्रांस के कई गांव में खाया जाता है। हांलाकि मार्डन जमाने के फ्रांस में भी आपको कुछ मांसाहारी दुकाने मिल जाएंगी जो घोड़े का मीट बेचती हैं। यह पश्चिमी द्वीप समूह और दक्षिण अमरीका के वृक्षों पर पाया जाने वाला छिपकली जैसी संरचना वाला जीव है। मैक्सिको और मध्य अमेरिका के लोग बताते हैं कि उन्‍हें इग्‍यूएना, चिकन की ही तरह स्वाद में लगता है।
सिल्‍क वार्म: कोरिया यहां पर सिल्‍क वार्म को रोस्‍ट कर के एक एपीटाइजर के रूप में खाया जाता है। यह खाने में टेस्‍टी और सिल्‍क की तरह मुलायम लगता है।
कछुआ: चाइना कछुए का मीट खाना बहुत आम बात हो गई है। कुछ दशकों पहले कुछुआ भारत में भी बहुत खाया जाता था। प्राचीन चीनी चिकित्सा में सेक्‍स लाइफ को बढाने के लिये कछुए का मांस खाने का प्रावधान है।
एमू: ऑस्ट्रेलिया टर्की के मुकाबले एमु स्‍वाद में टेस्‍टी होता है। इस देसी पक्षी को ऑस्ट्रेलिया में अक्सर खाया जाता है।
कुत्‍ता: कुत्तों को आदमी का सबसे अच्छा दोस्त और एक बहुत वफादार जानवर माना जाता है। लेकिन वियतनाम में, यही कुत्‍ता उनकी थाली में एक डिश के तौर पर परोसा जाता है।
गिनी सुअर: पेरू गिनी सूअरो देखने में बड़े ही प्‍यारे लगते हैं, लेकिन पेरू के लोग अभी भी इसे चूहों के रूप में ही देखते हैं। पेरू और मध्य अमेरिका में आने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि अगर आप यहां छुट्टियां बिताने अपने पालतू जानवर के साथ आ रहे हैं तो, इसे आपसे कहीं भी छीन लिया जा सकता है और फिर इसे भून कर खाया जा सकता है। इसको रोकने के लिये दुनिया भर से कई पर्यावरण प्रेमी विरोध कर रहे हैं।
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s