कुरूक्षेत्र शहर से आठ किलोमीटर आगे पेहवा रोड पर स्थित है ज्योतिसर। कहते हैं कि ज्योतिसर वही जगह है जहां पर महाभारत के युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। उन्होंने अर्जुन को गीता के 18 अध्याय सुनाने के बाद युद्ध के लिए तैयार किया था।
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 ज्योतिसर में पुराना वट वृक्ष है। कहा जाता है कि जब अर्जुन ने अपने ही बंधु बांधवों के खिलाफ शस्त्र उठाने से इनकार कर दिया। तब इसी पेड़ के नीचे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के 18 अध्याय सुनाए थे।  वट वृक्ष ही गीता की घटना का एक मात्र साक्षी है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसी वृक्ष के आगे सिर नवाते हैं। ज्योतिसर नाम इसलिए कि यहां एक बड़ा सरोवर है, जिसे ज्योति सर कहते हैं। ज्योति सर यानी ज्ञान का सरोवर हालांकि कुछ लोग इसे ज्योतिश्वर महादेव भी कहते हैं। कहा जाता हैं यहां कभी एक प्रचीन शिव मंदिर भी हुआ करता था। ज्योतिसर का पवित्र तीर्थ स्थान सरस्वती नदी के किनारे है। पर ये नदी अब लुप्त प्राय है।
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 1967 में अक्षय वृक्ष के निकट हुआ कृष्ण-अर्जुन रथ का निर्माण –
  कहते हैं कि आदि शंकराचार्य भी यहां गीता के बारे में चिंतन मनन के लिए आए थे। ज्योतिसर के परिसर में मौजूद प्राचीन शिवमंदिर के निर्माण को कश्मीर के राजा से जोड़कर देखा जाता है।
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