जानिए, महिला नागा साधुओं की दुनिया से जुड़े 10 अनोखे तथ्‍य….

सनातन धर्म की रक्षा के लिए आदि शंकराचार्य ने साधु-संतों के अखाड़ों की परंपरा शुरू की थी। इन अखाड़ों में दंडी सन्‍यासियों के साथ-साथ वीर योद्धा संन्‍यासियों के रूप में नागा साधुओं को भी अहम स्‍थान प्रदान किया गया। हम सब इन नागा साधुओं की अनोखी दुनिया के बारे में जानना चाहते हैं। हालांकि, हम में से बहुत कम लोग ही इस बात से वाकिफ हैं कि नागा साधुओं की तरह ही नागा साध्‍वियों (महिला नागा साधु) का भी अस्‍तित्‍व होता है। तो आइए, जानते हैं नागा साध्‍वियों की दुनिया से जुड़े 10 अनोखे किंतु महत्‍वपूर्ण तथ्‍य।
1-  सबसे ज्‍यादा नागा साध्‍वियां जूना अखाड़े में हैं। इनमें भी सबसे ज्‍यादा साध्‍वियां नेपाल से हैं, जहां सनातन हिन्‍दू धर्म के लिए लोगों में विशेष अनुराग देखने को मिलता है। यही नहीं जूना अखाड़े की नागा साध्‍वियों में यूरोपियन देशों की महिलाएं भी हैं जो सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं से प्रभावित होकर साध्‍वी बन चुकी हैं।
2- नागा साध्‍वी बनने से पहले किसी भी महिला या युवती को कठिन तप का पालन करना पड़ता है। महिलाएं जिस अखाड़े से जुड़कर नागा साध्‍वी बनना चाहती हैं वहां के महामंडलेश्‍वर उन्‍हें 6 से 12 वर्ष तक की कठिन ब्रह्मचर्य व्रत का निर्देश देते हैं।
3- इस दौरान महिलाओं को भूमि पर शयन, दान या भिक्षा में मिला सात्‍विक भोजन ग्रहण करना, संभोग या यौनाचार से दूर रहना, सनातन धार्मिक ज्ञान अर्जित करना, प्राणायाम और योग करना होता है। इसके बाद जब गुरु इनके ब्रह्मचर्य के पालन से संतुष्‍ट होते हैं तब इन्‍हें नागा साध्‍वी के रूप में दीक्षा दी जाती है।
4- ब्रह्मचर्य व्रत में उत्‍तीर्ण होने के बाद अखाड़े के महामंडलेश्‍वर या नियुक्‍त किये गये गुरु इनके पिछले जीवन की पड़ताल करते हैं। यथा- इनके मां-बाप, भाई-बहन, पति-पुत्र आदि के बारे में विस्‍तृत जानकारी ली जाती है।
aa.gif
5- साधु-संतों के लिए मोह-माया का त्‍याग कर अपने आप को साध लेना अनिवार्य माना गया है। ऐसे में नागा साध्‍वियों को भी इन विकारों का त्‍याग करना होता है। महिलाओं में चूंकि मोह और ममता की शक्‍ति कुछ ज्‍यादा ही होती है ऐसे में नागा साध्‍वियों को ये साबित करना होता है कि उन्‍हें अपने पिछले जीवन के सगे-संबंधियों के प्रति जरा भी मोह नहीं है। गुरु या अखाड़े के महामंडलेश्‍वर इस बात की पूरी तरह से तस्‍दीक करने के लिए कई प्रकार के कठिन प्रयोग भी करते रहते हैं जिससे यह पता लगाया जा सके कि नागा साध्‍वियों के मन में किसी प्रकार की मोह-ममता तो व्‍याप्‍त नहीं हो गई है।
6- नागा साध्‍वियों को भी पुरुष साधुओं की भांति दीक्षा ग्रहण करने से पहले अपना पिंडदान और श्राद्ध करना पड़ता है। इसके बाद ही इनका नागा साध्‍वी के रूप में पुनर्जन्‍म होता है।
7- लौकिक गुरु से दीक्षा मिलने के बाद नागा सध्‍वियां पूरे दिन भगावन शिव का जप करती हैं। इन्‍हें सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना होता है। इसके बाद नित्‍य क्रिया से निवृत्‍त होकर तथा योग और प्राणायम करके शिव का ध्‍यान करना होता है। दोपहर को भोजन के पश्‍चात फिर से शिव का जप करना होता है और शाम को भगवान दत्‍तात्रेय का पूजन-अर्चन करने के उपरांत अल्‍पाहार और फिर दो घंटे के बाद शयन करने की इजाजत मिलती है।
8- पुरुष नागा साधुओं की भांति ही नागा साध्‍वियों को भी अखाड़ों में पूरा-पूरा सम्‍मान प्राप्‍त होता है। अखाड़ों में इन्‍हें माता कहकर पुकारा जाता है। फिर चाहे वह उम्र में कितनी ही छोटी क्‍यों ना हों।
9- कुंभ या अर्द्धकुंभ के अवसर पर नागा साधुओं और विभिन्‍न अखाड़ों या पीठों के दंडी सन्‍यासियों की भांति ही नागा साध्‍वियों का भी शाही स्‍नान होता है।
10- यहां ध्‍यान देने वाली बात यह है कि नागा साधुओं की भांति साध्‍वियों को नग्‍न रहने की इजाजत नहीं होती। इन्‍हें माथे पर तिलक धारण करना होता है। साथ ही भगवा या श्‍वेत चोला धारण करना इनके लिए अनिवार्य है। यही नहीं नग्‍न स्‍नान की छूट इन्‍हें नहीं होती, यहां तक कि कुंभ या अर्द्धकुंभ के दौरान होने वाले शाही स्‍नान में भी इन्‍हें नग्‍न स्‍नान की छूट नहीं दी जाती।
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s