उत्तरप्रदेश में देवरिया जिले के मझौलीराज के निकट हिरण्यावती नदी के तट पर स्थित पौराणिक दीर्घेश्वरनाथ मंदिर में मन्नत पूरी होने की आशा लेकर आने वाले श्रद्धालुओं का हर दिन तांता लगा, उत्तरप्रदेश में देवरिया जिले के मझौलीराज के निकट हिरण्यावती नदी के तट पर स्थित पौराणिक दीर्घेश्वरनाथ मंदिर में मन्नत पूरी होने की आशा लेकर आने वाले श्रद्धालुओं का हर दिन तांता लगा रहता है।

इस मंदिर में वैसे तो पूरे वर्षभर भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है लेकिन शिवरात्रि, श्रावण मास और अधिकमास में मन्नत पूरी होने की आस लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ती है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां शिवलिंग स्वयंभू है। अधिकमास में यहां एक महीने मेला जैसा रहता है।

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लोगों की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां अपनी मन्नत मांगता है, वह पूरी जरूर होती है। यहां पूजा-अर्चना करने वाले की मन्नत पूरी होने के साथ ही उसकी उम्र भी लंबी हो जाती है तथा उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। ऐसी भी मान्यता है कि यहां प्रतिदिन चिरंजीवी अश्वत्थामा पूजा-अर्चना करने आते हैं। मंदिर के महंत जगन्नाथ दास ने बताया कि मस्तक के घाव के कारण अश्वत्थामा आज भी तड़पते और इधर-उधर भटकते हैं।

भगवान शिव द्वारा भक्तों को दीर्घायु का आशीर्वाद दिए जाने के कारण इस मंदिर को दीर्घेश्वरनाथ महादेव के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अश्वत्थामा इस मंदिर में रात के तीसरे पहर में आते हैं तथा भगवान शिव की पूजा करके चले जाते हैं। सुबह जब मंदिर का द्वार खोला जाता है तो यहां पर सारी पूजन-सामग्री शिवलिंग पर चढ़ी मिलती है।

 

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