गुरुओं की धरती कपालमोचन में लड़का-लड़की का रिश्ता कोई ओर नहीं, बल्कि खुद भगवान श्री कृष्ण करवाते हैं। मेले में आने वाले श्रद्घालु कृष्ण जी के प्रिय वृक्ष कदंब से मन्नत मांगने आते हैं। चमत्कार देखिए कि एक साल के भीतर ही शादी के लिए मांगी गई मुराद पूरी भी हो जाती है। कपालमोचन की धरती पर सिर्फ रिश्ते ही नहीं बनते, बल्कि सूनी गोद भी भरती है

यमुनानगर के मेला कपाल मोचन में सूरजकुंड सरोवर के पास स्थित कदंब के इस पेड़ के चारों तरफ घूम घूम कर महिलाएं और पुरूष सूत का धागा बांधते हैं और पूरी श्रृद्धा एंव आस्था के साथ पूजा अर्चना करते हैं। इसके बाद स्नान कर सरोवर के किनारे दीप जलाकर अपने बच्चों के लिए अच्छा रिश्ता या फिर अपने लिए संतान मांगते हैं । आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस पेड़ में ऐसा है क्या है जो लोगों को अपनी तरफ खींच लाता है। श्रद्धालुओं की माने तो प्राचीन काल में भगवान श्री कष्ण इसी पेड़ पर बैठ कर बांसुरी बजाते थे और यह पेड़ अब अमर हो चुका है।

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मान्यता है कि कदंब के इस पेड़ पर धागा बांधने से हर मुराद पूरी होती है। यही वजह है कि जिस लड़के या लड़की की शादी नहीं होती उनके परिजन यहां आकर मन्नत मांगते हैं। कहा जाता है कि एक साल के भीतर ही मन्नत पूरी भी हो जाती है। मन्नत पूरी होने पर लोग कदंब पेड़ के साथ मंदिर में कष्ण जी की प्रतिमा पर सेहरा बांधते हैं और बांधे गए सूत की गांठ खोल देते हैं।

इतिहास के पन्नो को अगर खंगाले तो कहीं यह भी लिखा हुआ मिल जाता है कि इसी कदंब के पेड़ के नीचे पांडवों के जन्म से पूर्व कुंती ने सूर्य देव से पुत्र कर्ण की प्राप्ति के लिए कठोर तप किया था। इसी तप से उन्हें कर्ण की प्राप्ति हुई थी। तभी से मेले में आने वाले श्रद्धालु यहां आकर पुत्र प्राप्ति की कामना करते हैं। माना जाता है कि कदंब के पेड़ पर लगने वाले फल को अगर विवाहिता की गोद में डाला जाए तो उसकी गोद भर जाती है। पेड़ के चारों ओर धागा बांधा जाता है। जब पुत्र की प्राप्ति हो जाती है तो लोग इस धागे को खोलने के लिए यहां जरूर आते हैं। यही वजह है कि सूरजकुंड सरोवर के पास सिर्फ सूत व प्रसाद बेचने वालों की ही दुकानें लगती है। हर साल सैकड़ों क्विंटल सूत कदंब पेड़ पर बांधा जाता है।

 

 

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