मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में कालीसिंध नदी के किनारे स्थित गडिय़ाघाट वाली माताजी का मंदिर है। बताया जाता है कि बीते पांच साल से इस मंदिर में एक दीपक जलता आ रहा है और इसमें न तो तेल डाला जाता है और ना ही घी। इस दीपक में सिर्फ पानी डाला जाता है।
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इस मंदिर में हजारों की संख्या में दर्शन करने के लिए भक्त आते हैं। कहते हैं मंदिर में जलने वाले दीपक में जब पानी डाला जाता है तो कुछ देर बाद वह चिपचिपा हो जाता है। उसके बाद दीपक अपने आप जलने लगता है।

बताया जाता है कि मंदिर के पुजारी को देवी मां ने स्वप्न में दर्शन दिए और पानी से दिया जलाने को कहा। तब उन्होंने ऐसा किया तो दिया जल उठा। जब ये बात गांव में फैली तो किसी को विश्वास नही हुआ, लेकिन कई ग्रामीणों ने अपने हाथ से पानी लेकर दीपक में डाला। जिससे वह निरंतर जलता रहा।
 पानी से जलने वाला ये दीपक बरसात के मौसम में नहीं जलता है। दरअसल, बारिश के पानी से कालीसिंध नदी का जल स्तर बढ़ जाता है। जिससे मंदिर पानी में डूब जाता है। इससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता। इसके बाद शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन यानी पड़वा से दोबारा ज्योत जला दी जाती है।

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