ट्रक का भारीभरकम टायर खोलना, रिपेयर करना और फिर उसे वापस अपनी जगह पर लगाना आसान काम नहीं, लेकिन 50 से ऊपर की उम्र की शान्ति देवी के लिए ये रोज का काम है. वे रोज 12 घंटे यही काम इतनी दक्षता के साथ करती हैं कि देखने वाले देखते रह जाते हैं. करीब 20 साल पहले शान्ति देवी अपने पति के साथ रोजी रोटी की तलाश में मध्यप्रदेश से दिल्ली आईं थीं. यहाँ आकर उन्होंने संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में एक चाय की दुकान खोल ली. दुकान चलने लगी लेकिन ट्रांसपोर्ट नगर में रोजाना सैकड़ों ट्रक आते जाते थे जिन्हें देख देख कर पति-पत्नी ने एक दिन वहीं ट्रक मैकेनिक की दुकान भी खोल ली. ट्रक के टायर खोलने चढ़ाने में अपने पति की मदद करते करते शान्तिदेवी न जाने कब इतनी सिद्धहस्त हो गईं कि धीरे-धीरे अकेली ही पूरा काम निपटाने लगीं. आज वे दिन भर में 10-12 टायरों की रिपेयरिंग आसानी से कर लेती हैं.

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अपने नाम के अनुरूप शान्ति से जीवनयापन करने वालीं और मेहनत को ही जीवन का मन्त्र मानने वाली शान्ति देवी को लोग जब एक ऐसा काम, जिस पर पुरुषों का ही एकाधिकार माना जाता है, करते हुए देखते हैं तो हैरत में पड़ जाते हैं. नारी की शारीरिक क्षमताओं पर संदेह करने वालों को एक बार उन्हें 50 किलो का भारी भरकम टायर बड़ी आसानी से बदलते हुए जरूर देखना चाहिए.

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