एक मासूम जानवर को ऐसी मां मिली है, जो न उसकी जाति की है और न ही उसके समुदाय की. फिर भी वह उस अनजान मां और परिवार के साथ खुश है. उसे किसी तरह की शिकायत नहीं है. दरअसल, हम इंसान इंसानियत को ताक पर रख कर जाति, धर्म और समुदाय के खाके में ऐसे सिमट गये हैं कि जानवर भी हमारे रंग-रूप को पहचानने लग गया है. अपनी मां से बिछड़े एक मासूम बंदर को सुरक्षा के लिहाज से इंसानों के पास आना चाहिए था. लेकिन उसने ऐसा करने के बजाय इंसानों से ज़्यादा सुरक्षित बकरियों के झुंड को चुना और उन्हीं बकरियों में से एक को अपनी मां भी मान लिया.

दरअसल, पूर्वी चीन के Tonggu प्रांत में अपने परिवार से अलग एक बेबी बंदर ने खेतों में चर रहे बकरियों को ही अपना परिवार मान लिया है और एक बकरी को अपनी मां. बकरियों के मालिक किसान, Zhong Shu जब अपनी बकरियों के झुंड को देखने गया, तो उसने पाया कि झुंड में एक बकरी की पीठ से बंदर का बच्चा चिपका हुआ था. डरे हुए, सहमे हुए उस बंदर ने जब इंसान को देखा, तो वह भयभीत हो गया और जाकर एक बकरी की पीठ से चिपक गया.

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और अब हालत ऐसी हो गई है कि वह मासूम बंदर अपनी नई मां के बिना कहीं भी जाने को तैयार नहीं होता है. जहां उसकी नई मां जाती है, वह भी वहीं जाना पसंद करता है. 

बकरियों के मालिक के मुताबिक, वह बंदर यहां लगभग चार-पांच दिनों से है. ऐसा लगता है कि वह बकरियों के बीच अपने आप को काफ़ी सुरक्षित महसूस करता है.

सबसे खास बात ये है कि बंदर किसान के दिये भोजन को नहीं खाता है. हालांकि, जब बकरियां मैदानों में चरने के लिए जाती हैं, तो वह भी उनके साथ जाता है. किसान के मुताबिक, उसने कई बार बंदर को केले खिलाने की कोशिश की, लेकिन वह किसी तरह का भोजन नहीं लेता है. वह बंदर सिर्फ़ अपनी मां के हाथों से खाना खाता है.

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बहरहाल, भले ही वह बंदर अपने नए परिवार के साथ सुरक्षित और बेहतर महसूस कर रहा हो, लेकिन उसे जल्द ही इस परिवार से अलग होना पड़ेगा. स्थानीय वन्यजीव सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, सबसे पहले उस बंदर को चिड़ियाघर में रखा जाएगा.

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