अब दिल्ली एनसीआर में बिना ड्राईवर के चलने वाले झूले दौड़ेंगे। इसके लिए दुनियाभर के अलग-अलग देशों से बड़ी-बड़ी कंपनियां टेंडर डाल रही हैं। रविवार को सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस बारे में बताया है। इस प्रोजेक्ट को मेट्रिनो प्रोजेक्ट भी कहा जा रहा है।
शुरू में जो पहला प्रोजेक्ट प्लान किया गया है, वो दिल्ली से हरियाणा के बीच 12 किलोमीटर की लंबाई के लिए प्लान किया गया है। जिसको बनाने का खर्च करीब 800 करोड़ रुपये आएगा। ये पहला प्रोजेक्ट दिल्ली के राजीव चौक होते हुए, गुड़गांव के पास ईफको चौक और सोहना रोड को जोड़ेगा। ये इंडिया का पहला ड्राईवर लेस पोड होगा जो रोप-वे की तरह काम करेगा।

ड्राईवरलेस पोड का मतलब और चलेगा कैसे…?

ये पोड समझ लें, एक डब्बे की तरह होगा। जो सड़कों के ऊपर 5-10 मीटर की हाइट पर लटका रहेगा। जो कि बिजली से चलेगी। अगर कभी कोई हिल स्टेशन घूमने गए होंगे तो आपने देखा होगा। पहाड़ के ऊपर वाले हिस्सों पर जाने के लिए एक प्लेटफॉर्म से बॉक्स की तरह रस्सियों के सहारे झूल रहे डब्बों में लोगों को बैठा कर ऊपर भेजा जाता है। ये भी कुछ ऐसा ही होगा। बस अंतर सिर्फ इतना होगा कि ये एक फिक्स हाइट पर एक जगह से दूसरी जगह तक जाएगा।

पहले प्रोजेक्ट में जो 12 किलोमीटर की दूरी कवर करने का प्लान है। उसमें 13 स्टेशन होंगे। अगर किसी आदमी को एक पहले स्टेशन से सीधा आखिरी स्टेशन जाना होगा तब उसमें ऐसा भी इंतज़ाम किया जाएगा जिससे वो नॉन-स्टॉप लास्ट स्टेशन तक चला जाए।

आगे की क्या तैयारी है…?

कुछ महीने पहले ही ड्राईवरलेस पोड को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक प्रेजेंटेशन भी दिया गया था। लेकिन बीच में थोड़ा वक़्त प्रोजेक्ट को किस डिपार्टमेंट के तहत फाइनल किया जाए, इन सब तैयारियों में लग गया।
ट्रांसपोर्ट मंत्री गडकरी बता रहे थे कि ये प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के अंदर तैयार किया जा रहा है। पहले हम सोच रहे थे कि इसे ट्रामवे एक्ट के तहत लाया जाए। फिर शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू से इस बारे में चर्चा हुई। जिसमें ये फाइनल हुआ कि इसे एनएचएआई(NHAI) के अंदर ही किया जाए।

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डिपार्टमेंट के एक अफसर ने बताया कि लंदन, अमेरिका, पॉलैंड और यूएई की कंपनियां हैं जिन्होंने टेंडर डाला है। एक बार मिनिस्ट्री से फाइनल हो जाए फिर हम इनसे आगे जल्दी से बात चीत करेंगे।

आगे का प्लान ऐसा है कि दिल्ली एनसीआर में करीब 70 किलोमीटर का एरिया कवर करने का प्लान है। जो कि तकरीबन 4000 करोड़ का प्रोजेक्ट होगा। अभी के लिए जो पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, उसके लिए 1100 पोड लाने की तैयारी है। इससे दिल्ली और एनसीआर एरिया में बढ़ रहे ट्रैफिक से लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी।

चलिए प्रोजेक्ट बने अच्छी बात है। टेक्नोलॉजी का जमाना है जब जो जी में आए बना लो। लेकिन हम तो यही सोच रहे हैं कि इतने सालों से मेट्रो का काम चलता ही जा रहा है।

जहां बन गया वहां ठीक। लेकिन जहां अटक गया है या काम चल रहा है वहां तो लोगों के पसीने छूट जा रहे हैं जाम में।

अब देखते हैं गडकरी साहब का प्रोजेक्ट कब तक तैयार होता है और इस बीच कितना कुछ देखने को मिलेगा। पढ़ते रहिए gazab news .

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