एक बार फिर से आसमान में खूबसूरत रंगीन नजारा दिखने जा रहा है. नासा ने कहा है कि हेली धूमकेतु के अवशेषों के पास से धरती के गुजरने की वजह से 21 और 22 अक्टूबर की रात आकाश में यह शानदार और अद्भुत नजारा लोगों को देखने को मिलेगा.

वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि इस नजारे को लोग नंगी आंखों से भी देख पाएंगे और प्रत्येक घंटे करीब 25 पुच्छल तारे दिखेंगे. नासा के वैज्ञानिक बिल कुक ने बताया कि शनिवार रात चांद इस उल्कापात के सामने दिखेगा, जिस वजह से चांद की चमक थोड़ी फीकी हो सकती है.

ऐसे देखिए ये नजारा

वैज्ञानिकों के मुताबिक, साल में केवल एक बार ऐसा होता है जब धरती सूर्य का चक्कर लगाते वक्त अपनी कक्षा के उस हिस्से से गुजरती है जहां हेली धूमकेतु के अवशेष मौजूद होते हैं. ऐसे में जब भी धरती उस खास हिस्से के करीब से गुजरती है तो आसमान में खूबसूरत नजारा दिखता है और लोगों को जगमग आतिशबाजी दिखाई देती है.

भारत में यह शानदार नजारा शनिवार सुबह 7.30 बजे (अमेरिकी समय के मुताबिक रात 10 बजे) दिखाई देगा, जिसे नासा के मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर की लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए देखा जा सकता है.

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क्या है पुच्छल तारा?

दरअसल, इस तरह की उलकाएं अंतरिक्ष में तैरती चट्टानें हैं, जो वातावरण के संपर्क में अक्सर आती रहती है. जब यह धरती के वातावरण से गुजरती है तो गरमी की वजह से चमकने लगती है और पुच्छल तारे के रूप में दिखती है.

वैसे विज्ञान की भाषा में चमकते हुए खगोलीय पिंड, जिनकी पूंछ हो उन्हें कॉमैट यानी पुच्छल तारा कहते हैं. ये सौर मंडल के ही हिस्सा हैं और सूर्य के चक्कर काटते हैं. ये पत्थरों, धूल और गैस से बने होते हैं. इनकी पूंछ में अमोनिया, मिथेन, भाप और बर्फ के कण होते हैं. जब भी सूर्य की किरणें इन पर पड़ती हैं तो ये चमकते लगते हैं.

 

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