भीड़-भाड़ वाले चौराहों, मंदिरों और मस्जिदों पर दिखने वाले भिखारियों की दशा देख उनकी कमाई का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। आपकी सोच से भी ज्यादा इनकी कमाई हो सकती है। आपको यह जानकर हैरत होगी कि भिखारी भी शिफ्ट में काम करते हैं। अपनी कमाई का टारगेट पूरा होते ही वे अपनी जगह छोड़ बैंक की तरफ रुख कर देते हैं। और तो और बैंक में खाता होने के साथ-साथ इन भिखारियों के एटीएम कार्ड भी होते हैं। पैसे वाले भिखारियों के इनकम का एक किस्सा अजमेर से सामने आया है..

ख़्वाजा गरीब नवाज़ का वरदान समझ बन गया भिखारी

बिहार के पप्पू सिंह के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उनके दोनों पैर काटने पड़े। इसके बाद भी वे खुद को लाचार नहीं समझते थे, लेकिन उनके पास कोई रोजगार नहीं था। एक बार वे अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह आए। तब कुछ लोगों ने उन्हें भिखारी समझ पैसा दे दिया। पप्पू सिंह को गुस्सा आया.. लेकिन दूसरे ही पल वे समझ गए ये ख्वाजा गरीब नवाज का वरदान है। तब से आजतक वे दरगाह के बाहर भीक मांगते है। पप्पू का टारगेट होता है कि शाम 5 बजे तक 200 रुपये आ जाएं और वे इसे अपने बैंक अकाउंट में जमा कर दें।

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10 साल से जमा कर रहे पैसा

दो भाई राजा इस्लाम और शहीदुल इस्लाम भी भीख मांग कर बैलेंस बना रहे हैं। दोनों भाई पिछले दस साल से भीख मांग रहे हैं। इन दोनों के पास भी बैंक अकाउंट और एटीएम कार्ड है। शहीदुल अंधा है और उसका भाई अजमेर की गलियों में भीख मांगने में उसकी मदद करता है।

30 किमी. की यात्रा कर मांगने आती हैं भीख

62 साल की नसीमा खानू किशनगढ़ से 30 किमी. की दूरी तय कर दरगाह आती हैं। दरगाह के आसपास के इलाकों में भीख मांगकर वे पैसे जुटाती हैं और बैंक में जमा करती हैं। हर दूसरे-तीसरे दिन नसीमा राष्ट्रीय बैंक में पैसे जमा करती हैं और एटीएम कार्ड से बैलेंस चेक करती रहती हैं।

 

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