बिहार का मोतिहारी आजकल एक बार फिर से वैझानिकों के लिए पहेली साबित हो रहा है। दरअसल यहां का हरसिद्धि प्रखंड इन दिनों अजीबो-गरीब पशुओं के जन्म को लेकर सुर्खियों में है।

कुछ दिनों पहले कनछेदवा गांव में एक बछिया बिना बच्चा जने दूध देना शुरू कर सबको चौंका दी थी, तो वहीं सोमवार को इसी प्रखंड के हरपुरराय के भोला मियां की मुर्गी अंडा देने की बजाय दो पिल्लों को जन्म देकर सुर्खियों में है।
जानकारी के अनुसार सोमवार को हरपुरराय के भोला मियां की मुर्गी ने पहले जब अंडा देने की बजाय एक कुत्ते के पिल्ले के आकार का बच्चा जना, तो भोला की पत्नी ने माथा पीट लिया। अभी मुर्गी को कोसते हुए पड़ोसी राकेश सिंह को मुर्गी की करतूत सुना ही रही थी कि मुर्गी ने उसके दुःख को दोहराते हुए उसी आकार के दूसरे पिल्ले को जन्म दे दिया।
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मुर्गी द्वारा पिल्ला जनने की खबर गांव में आग की तरह फैल गयी। लोगों की भीड़ जमा हो गयी। तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी। इस घटना को लेकर औरतों की जुबान पर घोर कलयुग आने की चर्चा है, तो ग्रामीण अजय कुमार ने बताया कि देशी नस्ल की ये मुर्गी पहले अंडे देती थी। हालांकि दोनों पिल्लों ने जन्म के कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया। सहायक जिला कुक्कुट पदाधिकारी डॉक्टर सुनील कुमार ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि 30 साल के अनुभव में ऐसा कभी नहीं देखा या सुना है। जन्म लेने वाले बच्चों के शेप में विकृति हार्मोनल इनबैलेंस के चलते बड़े पशुओं में होता था। मुर्गी में फीटल डिफॉर्मिटी का केस पहली बार सुनने को मिला है।

 हरसिद्धि प्रखंड के ही उत्तरी कनछेदवा गांव के किसान लल्लन ठाकुर की एक 25 महीने की बछिया बिना बछड़ा जने दूध देने वाली गाय बन गई है। किसान के पुत्र अरविन्द ठाकुर बताते हैं कि नवंबर 2015 में उत्तर प्रदेश के तमकुही से 15 माह की बाछिया खरीदी थी। 25 माह की होने पर थन बहुत बड़ा हो गया और बाछिया की तबियत खराब रहने लगी। चिकित्सक की सलाह पर हमने लगातार उसे दुहना जारी कर दिया। आज इससे सुबह-शाम मिलाकर सात किलो दूध निकल रहा है।
इस बारे में भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी कुमार निरंजन बताते हैं कि हार्मोन के असंतुलन के कारण ऐसा होता है। किसी-किसी पशु में हार्मोनल इंजेक्शन के असर से भी बिना बछड़ा जने दूध देने का मामला सामने आया है। इस तरह के दूध के सेवन में कोई हानि नहीं है।
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