इंदौर सहित देशभर में रावण दहन को लेकर कई अजीब परंपराएं चल रही हैं। कहीं रावण के दर्शन के लिए 108 बार राम का नाम लिखने की शर्त है तो कहीं रावण दहन दशहरे के अगले दिन किया जाता है। एक जगह ऐसी भी है जहां महिलाएं आज भी रावण के पुतले के आगे घूंघट करती हैं।

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रावण को देखने के लिए राम नाम की शर्त
इंदौर के वैभवनगर में रावण का एक ऐसा मंदिर है, जिसमें भगवान राम के साथ रावण, कुंभकरण और मेघनाथ की मूर्तियां हैं। यहां रावण को देखने आए लोगों को 108 बार राम नाम लिखना पड़ता है। ऐसा किए बिना कोई व्यक्ति मंदिर के भीतर प्रवेश नहीं कर सकता है। राम का निराला धाम नामक इस मंदिर के संस्थापक, संचालक और पुजारी का कहना है कि राम से जुड़ा हर पात्र पूजनीय है, इसीलिए यहां भगवान के साथ राक्षसों की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं।

 

महिलाएं करती हैं रावण के आगे घूंघट
मंदसौर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन समय में इसका नाम मन्दोत्तरी हुआ करता था। ऐसी मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी मंदसौर की थी, इस लिहाज से मंदसौर रावण की ससुराल है। मंदसौर में नामदेव समाज की महिलाएं आज भी रावण की मूर्ति के सामने घूंघट करती हैं और रावण के पैरों पर लच्छा (धागा) बांधती हैं। यहां दशहरे के दिन रावण को जलाने के उसकी बजाए पूजा की जाती है। प्रतिवर्ष दशहरे पर रावण के पूजन का आयोजन मंदसौर के नामदेव समाज द्वारा किया जाता है। प्राचीन परंपरा के अनुसार दशहरे की सुबह गाजे-बाजे के साथ लोग लक्ष्मीनाथ मंदिर से खानपुरा स्थित रावण की प्रतिमा स्थल पहुंचकर प्रतिमा के पैरों पर लच्छा बांधते हैं।

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आपदा दूर करने के लिए रावण के सामने अनशन पर बैठता है पुजारी
उज्जैन के पास चिखली गांव के लोग मानते हैं कि उनके गांव पर रावण की कृपा है। जब भी यहां सूखा या बाढ़ जैसी विपत्ति आती है तो गांव का पुजारी रावण की मूर्ति के सामने अनशन पर बैठ जाता है। ऐसी मान्यता है कि दो तीन दिन में ही विपत्ति दूर हो जाती है। यहां रावण की विशाल मूर्ति है। दशहरे के दिन  पूरा गांव रावण की पूजा करता है। इस दौरान यहां रावण का मेला भी लगता है। बुजुर्गों की माने तो एक साल रावण की पूजा नहीं हुई तो पूरे गांव में भीषण आग लग गई थी।
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कोलार : कर्नाटक के कोलार जिले में भी लोग रावण की पूजा करते हैं। यहां लंकेश्वर महोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान भगवान शिव के साथ रावण की प्रतिमा को लेकर जुलूस निकाला जाता है। यहां के मंडया जिले के मालवल्ली तालुका में रावण को समर्पित एक मंदिर भी है।
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