अलवर शहर से करीब 3 किमी दूर रावण देहरा गांव है। लोग इस गांव का संबंध रावण से बताते हैं। जैन शास्त्रों की मानें तो रावण यहां पार्श्वनाथ (भगवान शंकर के रूप) की पूजा करने आया था। यहीं उसे पारस पत्थर मिला जिसके संपर्क से लोहा भी सोना बन जाता था। इसी पारस पत्थर के सहारे उसने सोने की लंका बनवाई थी। जानिए क्या है कहानी…
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– रावण देहरा गांव में आज भी प्राचीन जैन मंदिर के भग्नावशेष मिलते हैं।
– कहते हैं इस मंदिर का निर्माण रावण ने खुद कराया था।
– रावण और मंदोदरी जब यहां पार्श्वनाथ की पूजा में लीन थे तभी इंद्रदेव प्रकट हुए पर्श्वनाथ की पूजा कर पारस चमत्कारिक पारस पत्थर का वरदान लेने को कहा।
– इसके बाद रावण ने उनकी पूजा कर पारस पत्थर प्राप्त किया। इस चमत्कारिक पत्थर के संपर्क में लोहा भी सोना बन जाता था।
– रावण ने लोहे से सोना बनाया और स्वर्ण नगरी (लंका) का निर्माण कराया।
– रावण देहरा गांव के जैन मंदिर की मूर्तियों को बीरबल मोहल्ले में स्थित जैन मंदिर में रखा गया है।
– इस मंदिर को रावण पार्श्वनाथ मंदिर कहा जाता है।
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