भारत में यहां है रावण का ससुराल, आज भी उसकी मूर्ति करती है लोगों का इलाज, जरूर पढ़ें

इंदौर।मंदसौर में नामदेव छीपा समाज के लोग रावण को अपना दामाद मानते है। यहां खानपुरा में रावण की 35 फीट ऊंची प्रतिमा है। मान्यता है कि इसके पैर पर लच्छा बांधने से बुखार दूर हो जाता है। दशहरे पर रावण से अनुमति लेकर सांकेतिक वध किया जाता है। दामाद के सामने महिलाएं करती हैं घूंघट, होता है सांकेतिक वध…
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– खानपुरा क्षेत्र में रावण की 35 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा है। बताते हैं कि प्रतिमा स्थल करीब 500 साल पुराना है। पहले यहां चूने और पत्थर से बनी प्रतिमा थी। बाद में नगर पालिका ने सीमेंट कांक्रीट की प्रतिमा बनवा दी है।
– रावण के 10 सिर थे, इसलिए उसे दशानन कहा जाता था लेकिन इस प्रतिमा में रावण के 9 सिर बनाए गए हैं। प्रतिमा के दोनों तरफ 4-4 मुख हैं। प्रमुख मुख के ऊपर दसवें सिर के रूप में गधे का मुंह बनाया गया है।
– यहां का नामदेव छीपा समाज रावण को अपना दामाद मानता है। समाज के राजेश नामदेव बताते हैं कि रावण की प्राचीन प्रतिमा में भी मुख्य सिर के ऊपर गधे का सिर था।
-उनके मुताबिक गधे का ये रूप रावण के अहंकार का प्रतीक है। रावण महाविद्वान और शक्तिशाली था लेकिन उसका घमंड उसके गुणों पर भारी था, इसी बात को इस प्रतिमा में गधे के रूप में दिखाया गया है।
इलाज करता है रावण
-ये किवदंती है कि रावण की पत्नी मंदोदरी मंदसौर की पुत्री थी। नामदेव छीपा समाज के लोग खुद को उसी के वंश का मानते हैं।
-समाज की महिलाएं आज भी रावण की मूर्ति के सामने घूंघट करती हैं। दशहरे के दिन समाज के लोग यहां एक मंदिर में इकट्ठे होते हैं।
– ये मान्यता है कि रावण की प्रतिमा के पैर में धागा (लच्छा) बांधने से बच्चों का मियादी बुखार दूर हो जाता है।
– बच्चों को ये बीमारी होने पर समाज की कई महिलाएं आज भी प्रतिमा को धागा बांधने आती है।
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ऐसे होता है दामाद का वध
– दशहरे के दिन सब लोग खानपुरा के एक मंदिर में इकट्ठे होते हैं।
– मंदिर से रामजी की सेना के रूप में लोग रावण प्रतिमा स्थल पर पहुंचते हैं। प्रतिमा का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
– इसके बाद समाज के लोग रावण से प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे दामाद हैं लेकिन आपने सीता हरण का अपराध किया इसलिए राम सेना आपका वध करने आई है। कृपया इसकी अनुमति दे।
– गोधुली बेला होते ही प्रतिमा स्थल पर कुछ देर के लिए अंधेरा कर दिया जाता है। इसके बाद रोशनी कर रावण के वध की घोषणा की जाती है और फिर रामजी की जीत का जश्न मनाते हुए लोग अपने घर लौट जाते हैं।
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