हिमाचल के कांगड़ा जिला के बैजनाथ में दशहरा पर्व पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। मान्यता है कि यदि कोई ऐसा करेगा तो उसे शिव के कोपभाजन से कोई नहीं बचा सकता। कोई भी यहां रावण का पुतला जलाने की कोशिश करेगा तो उसकी मौत हो जाएगी। इस दिन यहां पूरे बाजार बंद रहते हैं। पढ़ें यहां कोई क्यों नहीं जलाया जाता रावण का पुतला…
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-भगवान शिव के मंदिर के लिए विख्यात हिमाचल प्रदेश के प्राचीन तीर्थ शहर बैजनाथ में रावण के पुतले को नहीं जलाया जाता।
-ऐसा माना जाता है कि बैजनाथ का शिव मंदिर शिव भक्त रावण की ही देन है और यहां स्वयं शिव भगवान बसते हैं।
-मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को रावण अपने साथ लंका ले जाना चाहते थे, लेकिन लघुशंका आने पर रावण ने शिवलिंग को जमी पर रख दिया था, और फिर उसे हिला भी नहीं पाया था। रावण को यहीं पर शिवलिंग छोड़कर जाना पड़ा था।
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पटाखे और मिठाइयां भी नहीं खरीदते हैं लोग यहां दशहरे पर..
-बैजनाथ के इलाके में रावण, कुंभकरण और मेघनाद का पुतला न बनाया जाता है और न ही जलाया जाता है।
-यहां रामलीला का आयोजन तो होता है लेकिन के पुतले नहीं जलाए जाते।
-दशहरे के अवसर पर लोग पटाखे और मिठाइयां भी नहीं खरीदते है और यहां के बाजार भी बंद रहते हैं ।
– माना जाता है कि 1204 ईस्वी में मंदिर के निर्माण के समय से अब तक यहां निर्विघ्न पूजा जारी है।
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