भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का ना अब पाकिस्‍तान के लिए शायद नया नहीं रह गया है। पाकिस्‍तान को उसी के घर में मात देने या सर्जिकल स्‍ट्राइक की हालिया स्क्रिप्‍ट उन्‍हीं की लिखी हुई है। एक पुलिस अधिकारी, फिर एक आईबी अधिकारी, एक जासूस और फिर एक एनएसए के तौर पर डोभाल ने हमेशा से ही अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। उनसे जुड़े कई ऐसे तथ्‍य हैं जो बेहद कम ही लोग शायद जानते हों। तस्‍वीरों में देखें उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य:-

1968 केरल बैच के IPS अफसर अजीत डोभाल अपनी नियुक्ति के चार साल बाद साल 1972 में इंटेलीजेंस ब्यूरो से जुड़ गए थे। अपने पूरे करियर में उन्‍होंने महज सात वर्षों तक ही पुलिस की वर्दी पहनी। पुलिस सेवा में उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए।

अजीत डोभाल ने करियर में ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया है। वह इस दौरान भारतीय एजेंट बनकर पाकिस्‍तान में करीब छह वर्ष तक रहे और अपने काम को बखूबी अंजाम दिया। साल 2005 में वह इंटेलीजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से रिटायर हुए।

सके बाद साल 2009 में अजीत डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट बने। इस दौरान न्यूज पेपर में लेख भी लिखते रहे।

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30 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया।

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए डोभाल ने कई आतंकियों को सरेंडर कराया था।

साल 1988 में अजीत डोभाल को सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले पुलिस अफसर थे।

20 जनवरी, 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्‍में अजीत डोभाल के पिता इंडियन आर्मी में थे। उन्‍होंने अजमेर मिलिट्री स्कूल से पढ़ाई करने के बाद इन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पोस्टग्रेजुएशन किया है।

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