बॉलीवुड में हर साल सैकड़ों फ़िल्में बनती हैं. इनमें से कुछ हिट तो कुछ फ्लॉप हो जाती हैं, लेकिन कई फ़िल्में ऐसी भी होती हैं जो जनता की पहुंच से जान-बूझ कर दूर रखी जाती हैं. सेंसर बोर्ड के अनुसार, इनमें से कुछ फिल्मों की भाषा ठीक नहीं होती तो कुछ के दृश्य अश्लील होते हैं. कुछ धार्मिक विचारों को ठेस पहुंचाती हैं तो कुछ ऐसे विषयों के बारे में बात करती हैं जो सामान्य जनता शायद हज़म न कर सके. लेकिन सेंसर बोर्ड एक बात नहीं समझता है और वो ये कि फ़िल्में देखना हमारे ऊपर निर्भर करता है. अगर किसी फ़िल्म का कंटेंट लोगों को नहीं पसंद आता है तो वो उसे नहीं देखें. दूसरी बात ये कि एक फ़िल्म बनाने में बहुत मेहनत लगती है. कई लोगों का खून-पसीना, ज़िन्दगी भर की कमाई लग जाती है. तो ये देखते हुए क्या इन फिल्मों को बैन करना ठीक है? इसका जवाब आप कमेंट कर के बताइयेगा, फिलहाल देखते हैं कि वो कौन सी फ़िल्में हैं जिनको सेंसर बोर्ड ने लाल झंडी दिखा दी.

1. बैंडिट क्वीन (1994)

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कुख्यात डाकू, फूलन देवी की ज़िन्दगी पर आधारित बैंडिट क्वीन के लिए सेंसर बोर्ड ने कहा था कि ये फ़िल्म अपमानजनक, अश्लील और अभद्र है. सेंसर बोर्ड इस फ़िल्म को इसलिए नहीं पचा पायी क्योंकि इसका विषय ही ऐसा था.

2. फायर (1996)

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दीपा मेहता के काम को पूरी दुनिया में काफ़ी सराहा जाता है. लेकिन हमारे देश में उनकी फिल्मों को बैन कर दिया जाता है. ऐसी ही एक फ़िल्म थी फायर जो काफ़ी विवादों में थी. इसमें शबाना आज़मी और नंदिता दास के बीच के शारीरिक संबंधों को दिखाया गया है. लेकिन दुर्भाग्य से, शिव सेना जैसे हिन्दू संघटनों को ये कहानी पसंद नहीं आई क्योंकि दोनों किरदार एक हिन्दू परिवार से हैं. इसके बाद शबाना आज़मी, नंदिता दास और दीपा मेहता को जान से मारने की धमकी आने लगी और अंततः सेंसर बोर्ड ने इस फ़िल्म को बैन कर दिया.

3. कामासूत्र- A Tale Of Love (1996)

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कामासूत्र का जन्म भारत में ही हुआ है. खजुराहो की कलाकृतियां जा कर देखो तो पता चलेगा. लेकिन जब इस विषय पर फ़िल्म बनाई गयी तो वो सेंसर बोर्ड को समझ नहीं आई. उनके अनुसार ये फ़िल्म अश्लील और अनैतिक थी. मीरा नायर ने इस फ़िल्म में १६वीं शताब्दी के चार प्रेमियों की कहानी बताई थी. फ़िल्म समीक्षकों को तो ये मूवी बहुत पसंद आई थी, लेकिन सेंसर बोर्ड को नहीं.

9. Sins (2005)

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ये फ़िल्म केरेला के एक क्रिस्चियन प्रीस्ट के ऊपर थी जिसे एक औरत से प्यार हो जाता है. दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन जाते हैं. कैसे ये प्रीस्ट, समाज और धर्म की मर्यादाओं को लांघ कर अपने प्यार कायम रखता है, ये फ़िल्म इसी पर आधारित है. कैथलिक लोगों को ये फ़िल्म एकदम पसंद नहीं आई थी क्योंकि इसमें कैथलिक धर्म को बहुत ही अनैतिक तरह से दर्शाया था. सेंसर बोर्ड को भी इस फ़िल्म के नग्न दृश्यों से परेशानी थी और इसीलिए उन्होंने Sins को बैन कर दिया.

12. गांडू (2010)

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जिस फ़िल्म का नाम ही गांडू हो, उससे क्या उम्मीद कर सकते हैं. ये एक बंगाली फ़िल्म थी, जिसमें रैप म्यूज़िक का उपयोग हुआ था. इसमें बहुत सारे सेक्स सीन्स थे और पूर्ण नग्नता दिखाई गयी थी. ब्लैक और वाइट में शूट हुई इस फ़िल्म को सेंसर बोर्ड से रिलीज़ की परमिशन नहीं मिली.

15. Unfreedom (2015)

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हाल ही में बैन हुई फ़िल्म, Unfreedom, बात करती है एक लेस्बियन जोड़े की प्रेम कहानी की और कैसे उनका सामना होता है इस्लामिक आतंकवादियों से. इसके बाद इनकी ज़िन्दगी क्या मोड़ लेती है, यही कहानी का विषय है. दो बेहद विवादस्पद विषय अगर एक ही फ़िल्म में डाल दिए जाएंगे तो धमाका तो होगा ही, साथ ही इसमें कई भड़काऊ सेक्स सीन्स हैं जिनकी वजह से सेंसर बोर्ड वैसे ही सकते में है. कुछ राज्यों को छोड़ कर, इस फ़िल्म को रिलीज़ की अनुमति नहीं मिली थी

 

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